Written by vijay
on June 3, 2022

prithivraj chauhan
यश राज फिल्म्स
ओर अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित फ़िल्म सम्राट पृथ्वीराज दर्शको के सामने है
इतिहास से सम्बंधित फिल्मे देखने वालों के लिए ओर इतिहास को करीब से समझने वाले दर्शकों के लिए एक सुनहरा मौका है उस समय को बड़े पर्दे पे देखने का
निर्देशक
चंद्रप्रकाश द्ववेदी
ने भारी भरकम बजट के साथ फ़िल्म बनाई है
कास्ट में अक्षय कुमार ,मानुषी छिल्लर ,सोनू सूद,मानव विज ओर संजय दत्त जैसे मंझे हुए कलाकार है
बात कहानी की तो
पृथ्वीराज मोहम्मद गौरी की कैद में दिखाई देते है और बब्बर शेरो से उनकी लड़ाई दिखाई जाती है
मेने सुना है कि ये शेर vfx वाले नही बल्कि असली शेर है जो फ़िल्म में नज़र आते है
शेरों से लड़ाई में पृथ्वीराज घायल हो जाते है और कहानी भूतकाल में चली जाती है
जिसमे हम रानी संयोगिता ओर उनके प्रेम के साथ मोहम्मद गौरी की पहली लड़ाई देखते है
वो गौरी को जीवन दान देकर उसे छोड़ देते है और
संयोगिता के पिता जयचंद पृथ्वीराज को दिल्ली का राजा बनने से नाराज होकर मोहम्मद गौरी से मिल जाते है
अंत मे हम सब जानते है शब्दभेदी बाण से वो मोहम्मद गौरी को एक ही तीर से मारकर वीरगति को प्राप्त होते है
ओर इसी के साथ अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज की फ़िल्म खत्म हो जाती है
अब बात करे एक्टिंग की तो अक्षय के साथ साथ मानुषी ने भी प्रभावित किया है
उनकी पहली फ़िल्म होने के बाद भी पर्दे पे वो कई जगह बढ़िया अभिनय करती नज़र आती है
दूसरे भाग में ओर जोहर वाले सीन में अभिनय में उनको पूरे नंबर दिए जाते है
संजय दत्त ने ज़ोरदार काम किया है एक्शन से लेकर कॉमेडी सभी मे वो छाए रहते है
विलेन के रूप में मानव का काम भी ठीक है
मगर पद्मावत में की गयी रनवीर की खिलजी वाली एक्टिंग को वो छू नही पाते
संगीत ठीक है
ऐसी फिल्मों में मेरा मानना है गाने न हो तो ओर अच्छा मगर उसके बिना हिंदी फिल्में बनती कँहा है
फ़िल्म में कई सीन ओर डॉयलॉग बढ़िया है
जो ज्यादातर अक्षय के हिस्से में ही आये है
अब कमी में जो मुझे सबसे ज्यादा लगी वो थी
चंदर वरदायी की अंतिम समय मे विश्व विख्यात पंक्तियां
चार हाथ चौबीस गज
अंगुल अष्ट प्रमाण
ता ऊपर सुल्तान है मत चूको चौहान
नही दिखाया गया
ये बहुत निराशाजनक था
इसके अलावा युद्ध के सीन वही घिसे पिटे थे कोई नयापन नही ऐसे सीन हम 25 साल पहले भी देख चुके है
इन सबके बाद भी सम्राट पृथ्वीराज भारतीय इतिहास को बहुत अच्छे से हमे दिखाती है
ओर इस तरह की फिल्मे देखने वालों को बहुत बढ़िया लगेगी
फ़िल्म पारिवारिक है और इसे पूरे परिवार के साथ देख सकते है
में दिया
7.5/10
धन्यवाद
प्रेम राठौर
पृथ्वीराज को महान दिखाने के लिए झूट का सहारा लिया गया है । पृथ्वीराज 1192 में मरा था और गौरी 1200 के बाद फिर भी इसमें पृथ्वीराज के हाथो मरता दिखाया गया है। पृथ्वीराज को महान दिखाने के लिए बहुत कुछ और दिखाया जा सकता था लेकिन अपने हित साधने के लिए इस झूट को दिखाया गया।